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धान बिक्री के लिए चार गांवों के दर्जनों किसानों का सत्यापन अटका,किसान परेशान

धान बिक्री के लिए चार गांवों के दर्जनों किसानों का सत्यापन अटका, किसान परेशान

Kishan : विशुनपुरा (कुशीनगर)। धान की फसल तैयार होने के बाद उपज बेचने की तैयारी कर रहे किसानों के सामने सत्यापन की समस्या खड़ी हो गई है। विशुनपुरा ब्लाक के नरचोचवा, सेखुई, मिठहा माफी समेत चार गांवों के दर्जनों किसानों की धान की फसल का सत्यापन अब तक पूरा नहीं हो सका है। इसके चलते एमएसपी पोर्टल पर फसल की पड़ताल प्रदर्शित नहीं हो रही है। किसान सरकारी खरीद केंद्रों पर धान बेचने के लिए परेशान हैं। सत्यापन कराने के लिए उन्हें तहसील और संबंधित अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। किसानों को आशंका है कि समय रहते समस्या दूर नहीं हुई तो उन्हें खुले बाजार में कम कीमत पर धान बेचने को मजबूर होना पड़ेगा।

सत्यापन नहीं होने से बिक्री प्रक्रिया प्रभावित

नरचोचवा गांव के संदीप तिवारी की दो एकड़, शैलेश की पांच एकड़, मुरारी तिवारी की सात एकड़, प्रेमशंकर की आठ एकड़ और विपिन की नौ एकड़ भूमि में धान की फसल तैयार है। इसी गांव के भूपेंद्र के पास पांच एकड़ से अधिक तथा गोपेश्वर के पास आठ एकड़ से अधिक भूमि में धान की खेती है। किसानों का कहना है कि फसल तैयार होने के बावजूद सत्यापन नहीं होने से सरकारी खरीद केंद्र पर धान बेचने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। किसान संबंधित कर्मचारियों से संपर्क कर समस्या दूर कराने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि फसल की कटाई के बाद उपज को सुरक्षित रखना भी मुश्किल हो रहा है।

सेखुई और मिठहा माफी के किसान भी परेशान

सेखुई गांव के अनिल मिश्र की पांच एकड़ से अधिक भूमि में धान की फसल है। वहीं मिठहा माफी गांव के अजयंत राय की आठ एकड़, अभय मिश्र की तीन एकड़ और राकेश की तीन एकड़ से अधिक भूमि में धान की खेती है। किसानों का कहना है कि उन्होंने सरकारी व्यवस्था के तहत धान बेचने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की है, लेकिन लेखपाल स्तर से फसल का सत्यापन नहीं होने के कारण एमएसपी पोर्टल पर स्थिति अपडेट नहीं हो रही है। इससे खरीद केंद्रों पर धान बेचने में परेशानी हो रही है। किसानों ने मांग की है कि संबंधित कर्मचारी मौके पर पहुंचकर फसल का सत्यापन पूरा करें, ताकि उन्हें समय से सरकारी खरीद का लाभ मिल सके।

जमीन और फसल का किया जाता है सत्यापन

सरकारी खरीद केंद्रों पर धान और गेहूं बेचने के लिए किसानों को पहले ऑनलाइन पंजीकरण कराना होता है। इसके बाद संबंधित राजस्व कर्मचारी द्वारा भूमि और फसल का सत्यापन किया जाता है। इसमें यह देखा जाता है कि संबंधित भूमि पर वास्तव में फसल बोई गई है या नहीं और खेती किसान स्वयं कर रहा है अथवा बटाई पर। बटाई पर खेती करने वाले किसानों के लिए नियमानुसार प्रमाण की आवश्यकता होती है। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किसान सरकारी खरीद केंद्र पर अपनी उपज बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ा पाते हैं। किसानों का कहना है कि सत्यापन लंबित होने से सरकारी खरीद की व्यवस्था का लाभ लेने में उन्हें परेशानी हो रही है।

खुले बाजार में कम कीमत पर बेचने का डर

किसानों ने बताया कि धान की कटाई के बाद उपज को लंबे समय तक रोककर रखना आसान नहीं है। यदि एमएसपी पर सरकारी खरीद नहीं हो पाती है तो किसानों को मजबूरी में खुले बाजार का रुख करना पड़ सकता है। वहां उन्हें सरकारी समर्थन मूल्य की तुलना में कम कीमत मिलने की आशंका है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसानों ने जिला प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित करने की मांग की है। उनका कहना है कि जल्द सत्यापन पूरा कर एमएसपी पोर्टल पर फसल की स्थिति अपडेट कराई जाए, ताकि समय रहते सरकारी खरीद केंद्र पर धान बेच सकें और उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।

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पीके पंचाल

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