रामलीला में भरत मिलाप से सीता हरण तक के प्रसंगों ने जीता श्रद्धालुओं का दिल
Ramleela: कुशीनगर मे कसया क्षेत्र के ग्रामसभा कुड़वा उर्फ दिलीपनगर के टोला धन्नीपट्टी स्थित ओंकारेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित पांच दिवसीय रामायण मंचन के तीसरे दिन गुरुवार को भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण और भावुक प्रसंगों का जीवंत मंचन किया गया। कलाकारों की प्रभावशाली प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। पूरे आयोजन के दौरान परिसर जय श्रीराम के जयघोष से गूंजता रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत चित्रकूट में भरत मिलाप के भावुक प्रसंग से हुई। मंचन के दौरान दिखाया गया कि भरत अपनी सेना के साथ चित्रकूट पहुंचकर प्रभु श्रीराम से अयोध्या लौटने का आग्रह करते हैं। माता कैकेयी के कृत्य के लिए क्षमा मांगते हुए वे श्रीराम के चरणों में समर्पित हो जाते हैं। इसी बीच महाराज दशरथ के निधन का समाचार मिलने पर सभी शोक में डूब जाते हैं।
पिता को दिए गए वचन और रघुकुल की मर्यादा का पालन करते हुए भगवान श्रीराम वनवास पूरा करने का अपना संकल्प दोहराते हैं। अंततः भरत प्रभु श्रीराम की चरण पादुकाएं लेकर अयोध्या लौटते हैं और उन्हें राजसिंहासन पर विराजमान कर स्वयं सेवक के रूप में राज्य का संचालन करते हैं। इस प्रसंग ने भाईचारे, त्याग, समर्पण और आदर्श प्रेम की अनुपम मिसाल प्रस्तुत की।
सूर्पणखा प्रसंग से सीता हरण तक का हुआ मंचन
इसके बाद पंचवटी में सूर्पणखा प्रसंग, खर-दूषण वध, स्वर्ण मृग की माया और रावण द्वारा माता सीता के हरण की लीला का मंचन किया गया। माता सीता की रक्षा के लिए पक्षीराज जटायु और रावण के बीच हुए संघर्ष का दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। कलाकारों ने अपने अभिनय से इन प्रसंगों को जीवंत कर दिया, जिसे देखकर श्रद्धालु भावुक हो उठे।
शबरी की निष्काम भक्ति ने दिया प्रेम का संदेश
रामायण मंचन के अंतिम चरण में माता सीता की खोज करते हुए भगवान श्रीराम के शबरी के आश्रम पहुंचने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। वर्षों से प्रभु श्रीराम के आगमन की प्रतीक्षा कर रहीं माता शबरी को जब भगवान के दर्शन होते हैं तो उनकी भक्ति और प्रेम का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। प्रभु श्रीराम उन्हें नवधा भक्ति का उपदेश देते हैं। इसके साथ ही शबरी द्वारा भगवान श्रीराम को सुग्रीव से मिलने का मार्ग बताने के प्रसंग के साथ तीसरे दिन की रामलीला का समापन हुआ।
इन प्रसंगों के माध्यम से कलाकारों ने त्याग, मर्यादा, भाईचारे, निष्काम भक्ति और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दीपनारायण अग्रवाल तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में अश्विनी तिवारी, त्रिभुवन मणि त्रिपाठी, राजन त्रिपाठी एवं डॉ. सीबी सिंह उपस्थित रहे।
रामलीला के सफल आयोजन में डॉ. चन्द्रशेखर सिंह, कामोद सिंह, संजय सिंह कौशिक, डायट प्रवक्ता धनंजय कुमार चतुर्वेदी, राजेश कुमार शुक्ला, अविनाश शुक्ला, शैलेश कुमार त्रिपाठी, मनोज कुमार सिंह, अनिरुद्ध त्रिपाठी, राकेश मणि त्रिपाठी, हरेंद्र कुमार चौरसिया, मंकेश राय, भृगुनाथ श्रीवास्तव, प्रेम कुमार गौड़, शिवाकांत सिंह, आलोक श्रीवास्तव, मुन्ना सिंह, विनोद गुप्ता, शशिप्रभा सिंहा एवं कालिंदी त्रिपाठी सहित अन्य लोगों का सराहनीय योगदान रहा।
इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। रामायण के आदर्श प्रसंगों ने लोगों को भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।



