Wednesday, August 26, 2026
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उत्तराखंड में लंपी वायरस की दस्तक, पशु परिवहन और मेलों पर एक माह की रोक

हल्द्वानी। उत्तराखंड के कई जिलों में गोवंशीय और महिषवंशीय पशुओं में लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) के मामले सामने आने के बाद पशुपालन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए राज्य सरकार ने एक जिले से दूसरे जिले तथा अन्य राज्यों में पशुओं के परिवहन पर एक माह के लिए रोक लगा दी है। साथ ही प्रदेश भर में पशु मेलों के आयोजन पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी के साथ टीकाकरण और उपचार अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है।

नैनीताल जिले में लंपी रोग की रोकथाम के लिए 135 सदस्यीय टीम को मैदान में उतारा गया है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी नैनीताल डॉ. राजीव सिंह ने बताया कि जिले के सभी पशु चिकित्सा अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। टीम में 28 पशु चिकित्सा अधिकारी, 72 पशुधन प्रसार अधिकारी और 35 पशु सखियां शामिल हैं, जो गांव-गांव जाकर पशुओं की जांच, उपचार और टीकाकरण का कार्य कर रही हैं।

विभाग ने जिन क्षेत्रों में संक्रमण के अधिक मामले सामने आए हैं, उन्हें हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित कर विशेष निगरानी शुरू कर दी है। स्वास्थ्य टीमें प्रभावित गांवों में पहुंचकर पशुपालकों को रोग के लक्षणों और बचाव के उपायों की जानकारी दे रही हैं। साथ ही संदिग्ध और संक्रमित पशुओं का नि:शुल्क उपचार एवं टीकाकरण किया जा रहा है ताकि संक्रमण को नियंत्रित किया जा सके।

लंपी रोग नियंत्रण अभियान के बीच जिले में 65 पैरावेट कर्मचारियों के हड़ताल पर होने से विभाग के सामने अतिरिक्त चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं। हालांकि विभाग ने उपलब्ध संसाधनों और मानवबल के माध्यम से अभियान को प्रभावित न होने देने के लिए पशु चिकित्सकों, पशुधन प्रसार अधिकारियों और पशु सखियों की जिम्मेदारियां बढ़ा दी हैं।

पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। विभाग के अनुसार यदि पशुओं में तेज बुखार, त्वचा पर गांठें, भूख कम लगना, आंखों या नाक से स्राव जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी को सूचना दें। संक्रमित या संदिग्ध पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने तथा पशुशालाओं में साफ-सफाई बनाए रखने की भी सलाह दी गई है।

विभाग का कहना है कि पशुओं की आवाजाही और पशु मेलों पर लगाई गई रोक का मुख्य उद्देश्य संक्रमण को नए क्षेत्रों में फैलने से रोकना है। अधिकारियों का दावा है कि समय रहते प्रभावी कदम उठाकर रोग पर नियंत्रण पाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

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