रामनगर।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन ने वन क्षेत्रों से सटे गांवों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से एक नई पहल शुरू की है। इस पहल के तहत अब वन क्षेत्र के आसपास रहने वाली महिलाएं जूट के बैग तैयार करेंगी, जिन्हें कॉर्बेट प्रशासन खरीदकर पर्यटन जोन खुलने के बाद जंगल सफारी पर आने वाले पर्यटकों को वितरित करेगा।
कॉर्बेट प्रशासन और पुष्कर सोसाइटी के संयुक्त प्रयास से ढेला गांव की 10 महिलाओं को जूट बैग निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद महिलाओं को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ते हुए उनकी जंगलों पर निर्भरता कम करना है।
वन क्षेत्र से सटे गांवों की कई महिलाएं आज भी घास और ईंधन लकड़ी के लिए जंगलों में जाती हैं, जहां उन्हें बाघ समेत अन्य वन्यजीवों से खतरा बना रहता है। अतीत में घास और लकड़ी संग्रह के दौरान कई लोगों पर वन्यजीवों के हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में महिलाओं को वैकल्पिक आजीविका उपलब्ध कराना मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पुष्कर सोसाइटी की निदेशक पुष्पा गुप्ता ने बताया कि उनकी संस्था महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रम संचालित कर रही है। महिलाओं को ऐपण कला, अचार निर्माण सहित अन्य गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे स्थायी आय के स्रोत विकसित कर सकें। जूट बैग निर्माण का यह प्रशिक्षण भी उसी श्रृंखला का हिस्सा है।
पार्क वार्डन बिंदर पाल ने बताया कि महिलाओं को सशक्त बनाने और उनकी वनों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि कॉर्बेट के सभी पर्यटन जोन खुलने के बाद महिलाओं द्वारा तैयार किए गए जूट बैग प्रशासन खरीदेगा और उन्हें जंगल सफारी पर आने वाले पर्यटकों को उपलब्ध कराया जाएगा।
यह पहल पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देगी। प्लास्टिक बैग के स्थान पर जूट बैग के उपयोग से सिंगल यूज प्लास्टिक पर निर्भरता कम होगी। वहीं, कॉर्बेट आने वाले पर्यटकों को स्थानीय महिलाओं के आत्मनिर्भरता प्रयासों से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा।
कॉर्बेट प्रशासन की यह पहल वन संरक्षण और स्थानीय समुदायों की आजीविका को साथ लेकर चलने का उदाहरण बन रही है। योजना सफल होने पर इसे वन क्षेत्र से सटे अन्य गांवों में भी विस्तारित किया जा सकता है, जिससे अधिक महिलाओं को रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर मिल सकेंगे।
