Monday, August 24, 2026
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अगले साल से ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव’ रक्षाबंधन से 15 दिन पहले शुरू होगा: सीएम धामी

देहरादून। उत्तराखंड में महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों के लिए बड़ा बाज़ार उपलब्ध कराने के मकसद से अभी चल रहे ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव’ का दायरा अगले साल से बढ़ाया जाएगा। सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का उद्घाटन और निरीक्षण किया। इस मौके पर उन्होंने घोषणा की कि अगले साल से यह उत्सव रक्षाबंधन से 15 दिन पहले शुरू होगा और दो हफ़्ते तक चलेगा।

मुख्यमंत्री ने स्टॉलों पर महिला समूहों द्वारा तैयार की गई राखियों और कई तरह के स्थानीय उत्पादों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने राज्य के सभी ज़िलों के स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से वर्चुअल तरीक़े से बातचीत भी की। उन्होंने कहा कि उत्सव की अवधि बढ़ाने से महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए ज़्यादा समय और बेहतर बाज़ार मिलेगा, जिससे उनकी आमदनी बढ़ेगी।

70,000 से ज़्यादा समूहों से जुड़े 5.20 लाख ग्रामीण परिवार

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने 2023 में ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना’ शुरू की थी, ताकि यह पक्का किया जा सके कि स्वयं सहायता समूहों के बेहतरीन स्थानीय उत्पाद सिर्फ़ गांवों तक ही सीमित न रहें, बल्कि उन्हें बड़े बाज़ार, सही दाम और नई पहचान मिल सके।

उन्होंने बताया कि अभी राज्य में 70,000 से ज़्यादा स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे 5.20 लाख से ज़्यादा ग्रामीण परिवार जुड़े हुए हैं। उनकी मदद के लिए 8,000 से ज़्यादा ग्राम संगठन और 615 क्लस्टर-स्तरीय फ़ेडरेशन भी काम कर रहे हैं।

4,480 स्टॉलों से ₹12.50 करोड़ की बिक्री

सीएम धामी ने कहा कि पिछले तीन सालों में इस योजना के तहत राज्य के 95 विकास खंडों में 4,480 स्टॉल लगाए गए हैं। इन स्टॉल्स पर लगभग ₹12.50 करोड़ के सामान की बिक्री की पेशकश की गई है।

उन्होंने कहा कि विकल्प और बाज़ार तक पहुँच मिलने से महिलाएँ न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मज़बूत कर सकती हैं। 3 लाख से ज़्यादा महिलाएँ बनीं ‘लखपति दीदी’

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में स्वयं-सहायता समूहों की 3 लाख से ज़्यादा महिलाएँ अब ‘लखपति दीदी’ (ऐसी महिलाएँ जिनकी सालाना आय ₹1 लाख या उससे ज़्यादा है) बन गई हैं। सरकार अब ‘सशक्त बहना उत्सव’ को ‘सशक्त बहना बाज़ार’ में बदलने पर काम कर रही है।

इस पहल के तहत, महिला समूहों द्वारा बनाए गए सामान को पर्यटन स्थलों, तीर्थ यात्रा मार्गों, रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों और होटलों व रिसॉर्ट्स में उपलब्ध कराने की योजना है।

110 बिक्री केंद्र और 49 विकास केंद्र स्थापित

महिला समूहों द्वारा बनाए गए सामान की मार्केटिंग और बिक्री को मज़बूत करने के लिए, राज्य ने 49 विकास केंद्र, 17 सरस केंद्र, 33 नैनो-पैकेजिंग यूनिट और आठ बेकरी यूनिट स्थापित किए हैं। इसके अलावा, यात्रा मार्गों पर अभी 110 बिक्री केंद्र चल रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इन उत्पादों के लिए स्थायी बिक्री केंद्रों जिनमें सचिवालय में बने केंद्र भी शामिल हैं और राज्य स्तरीय सरस मेलों के ज़रिए भी बाज़ार तक पहुँच उपलब्ध कराई जा रही है।

‘हाउस ऑफ़ हिमालयाज़’ स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाएगा

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘हाउस ऑफ़ हिमालयाज़’ ब्रांड उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को ‘लोकल से ग्लोबल’ (स्थानीय से वैश्विक) बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। स्वयं-सहायता समूहों के उत्पादों को ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से जोड़ने के साथ साथ, महिलाओं को क्वालिटी कंट्रोल, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, लेबलिंग, डिजिटल पेमेंट और मार्केटिंग की ट्रेनिंग भी दी जा रही है।

उन्होंने सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे महिला समूहों के स्टॉल्स से सामान खरीदकर उनका हौसला बढ़ाएँ। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पाद खरीदना ‘वोकल फ़ॉर लोकल’ की सच्ची भावना को दर्शाता है। इससे न केवल इन महिलाओं के हुनर ​​का सम्मान होता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मज़बूत होती है।

मुख्यमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि उत्तराखंड की महिलाएँ सामाजिक और आर्थिक विकास का मज़बूत आधार हैं। खेती, पशुपालन और आजीविका के अन्य कामों के अलावा, महिलाएं अब उद्यमिता के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रही हैं। सरकार महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा, आत्म सम्मान और आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस कार्यक्रम में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव धीरज गर्ब्याल, अतिरिक्त सचिव झरना कमठान और अनुराधा पाल, देहरादून के मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह और अन्य अधिकारी मौजूद थे। विभिन्न जिलों के मुख्य विकास अधिकारी भी वर्चुअल माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

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