Friday, June 5, 2026
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Tourism: जंगल, जन और पर्यटन को जोड़ेंगे लोहाँजुंग के प्रशिक्षित नेचुरलिस्ट

Tourism: जंगल, जन और पर्यटन को जोड़ेंगे लोहाँजुंग के प्रशिक्षित नेचुरलिस्ट

Tourism: उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद (UTDB) एवं टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी स्किल काउंसिल (THSC) के सहयोग से लोहाजंग में आयोजित 15 दिवसीय नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया। कार्यक्रम का संचालन समर्पित मीडिया सोसायटी द्वारा किया गया।

समापन समारोह में वन विभाग लोहाजंग के वन क्षेत्राधिकारी प्रदीप तौपाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में हिमालयन ईको पर्यटन स्वायत सहकारिता के अध्यक्ष भुवन चन्द्र सिंह बिष्ट, पूर्व प्रधानाचार्य खड़क सिंह, समर्पित मीडिया सोसायटी के अध्यक्ष पंकज शर्मा, वन विभाग के अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

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पर्यटन क्षेत्र से जोड़ना राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल

उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद की अपर निदेशक पूनम चन्द वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़ीं। उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर पर्यटन क्षेत्र से जोड़ना राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल है, जिससे रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में लोहाजंग, देवाल एवं आसपास के क्षेत्रों के 40 युवाओं ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण, पक्षी पहचान, स्थानीय वनस्पतियों, प्रकृति व्याख्या कौशल, पर्यटक प्रबंधन, संचार कौशल, अतिथि सत्कार, प्राथमिक उपचार, सुरक्षा प्रबंधन तथा जिम्मेदार पर्यटन जैसे विषयों की जानकारी दी गई।

प्रायोगिक प्रशिक्षण के तहत प्रतिभागियों को आजन टॉप, मंडोली नेचर ट्रेल एवं बांक गांव नेचर ट्रेल का भ्रमण कराया गया। इस दौरान प्रशिक्षुओं ने क्षेत्र की जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों और पर्यटन संभावनाओं का प्रत्यक्ष अध्ययन किया।

मुख्य अतिथि प्रदीप तौपाल ने कहा कि प्रशिक्षित नेचुरलिस्ट भविष्य में वन विभाग और स्थानीय समुदाय के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बनेंगे। उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षण, स्थानीय आजीविका और पर्यटन विकास को एक साथ आगे बढ़ाने में इन युवाओं की अहम भूमिका रहेगी।

समारोह के दौरान सभी सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। वक्ताओं ने कहा कि यह प्रशिक्षण केवल प्रमाण-पत्र प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय युवाओं को अपने प्राकृतिक संसाधनों, संस्कृति और पर्यटन संभावनाओं से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।

कार्यक्रम के अंत में जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करने तथा स्थानीय युवाओं के लिए नए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर विकसित करने का संकल्प लिया गया।

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