Monday, April 20, 2026
HomeUttarakhand130 पर्यावरण बटालियन के विस्थापन पर बवाल, 34वें दिन भी आंदोलन जारी

130 पर्यावरण बटालियन के विस्थापन पर बवाल, 34वें दिन भी आंदोलन जारी

पिथौरागढ़।
130 पर्यावरण बटालियन के प्रस्तावित विस्थापन के खिलाफ जनपद पिथौरागढ़ में पूर्व सैनिकों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। लगातार 34वें दिन भी धरना उसी जोश, जज्बे और अडिग संकल्प के साथ जारी रहा, लेकिन अब आंदोलनकारियों का तेवर पहले से कहीं अधिक उग्र हो चुका है। प्रतिकूल मौसम और प्रशासनिक अनदेखी के बावजूद आंदोलन न केवल जारी है बल्कि तेजी से जनांदोलन का रूप लेता जा रहा है, जिससे शासन-प्रशासन पर दबाव भी बढ़ने लगा है।

धरना स्थल पर शनिवार को बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों के साथ विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि पहुंचे और आंदोलन को खुला समर्थन दिया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यह मुद्दा केवल पूर्व सैनिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जनपद के पर्यावरण, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा हुआ है। प्रस्तावित विस्थापन को जनपद के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की गई।

धरने में 12 कुमाऊं रेजीमेंट के पूर्व सैनिकों की सक्रिय भागीदारी रही, वहीं उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व विधायक काशी सिंह ऐरी और जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर पुनेड़ा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे। इसके अलावा सीनियर सिटीजन एसोसिएशन के अध्यक्ष डीएन भट्ट, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश कापड़ी सहित कई गणमान्य लोगों ने आंदोलनकारियों के साथ एकजुटता जताते हुए संघर्ष को और तेज करने पर जोर दिया।

लगातार शासन-प्रशासन की उदासीनता से पूर्व सैनिकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही विस्थापन का निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को सड़कों पर उतारते हुए विशाल रैली और उग्र जनांदोलन की शुरुआत की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। आंदोलनकारियों ने यह भी कहा कि अब यह लड़ाई केवल एक मांग नहीं, बल्कि सम्मान, अस्तित्व और भविष्य की लड़ाई बन चुकी है।

पूर्व सैनिकों ने जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे जनता के साथ विश्वासघात करार दिया। उनका कहना है कि जब इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर जनप्रतिनिधि सामने नहीं आ रहे हैं, तो यह स्पष्ट संकेत है कि जनता को अपने अधिकारों के लिए स्वयं ही निर्णायक संघर्ष करना होगा।

आंदोलन को और धार देते हुए पूर्व सैनिक संगठन ने 2027 के विधानसभा चुनावों के बहिष्कार की घोषणा भी कर दी है। इसके तहत हस्ताक्षर अभियान चलाकर शपथ पत्र के माध्यम से चुनाव बहिष्कार का संकल्प लिया जाएगा और इसे चुनाव आयोग को भेजा जाएगा। संगठन का कहना है कि जो सरकार अपने सैनिकों और उनके योगदान की अनदेखी करती है, उसे लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा।

धरना स्थल पर मौजूद पूर्व सैनिकों ने भावुक होते हुए कहा कि जिस वर्दी पर उन्हें जीवन भर गर्व रहा, आज वही सम्मान सरकार की नीतियों के कारण आहत हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब यह संघर्ष किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाला नहीं है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

Latest Post

Most Popular