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HomeUttar Pradeshपराली न जलाएं किसान, वैज्ञानिक विधि से करें प्रबंधन: जिलाधिकारी 

पराली न जलाएं किसान, वैज्ञानिक विधि से करें प्रबंधन: जिलाधिकारी 

पराली न जलाएं किसान, वैज्ञानिक विधि से करें प्रबंधन: जिलाधिकारी 

Kisan Diwas: कलेक्ट्रेट सभागार में बुधवार को जिलाधिकारी  कुशीनगर संजय चौहान की अध्यक्षता में किसान दिवस का आयोजन किया गया। बैठक में किसानों की समस्याओं, कृषि संबंधी योजनाओं, फसल क्षतिपूर्ति तथा खाद-बीज की उपलब्धता की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को किसानों की समस्याओं का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

पराली जलाने के बजाय वैज्ञानिक विधि से करें प्रबंधन

जिलाधिकारी संजय चौहान ने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेष यानी पराली को खेतों में न जलाएं, बल्कि उसका वैज्ञानिक विधि से प्रबंधन करें। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पराली के उचित प्रबंधन और उसकी बिक्री की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।

किसानों की शिकायतों का प्राथमिकता पर हो निस्तारण

बैठक की शुरुआत में उप कृषि निदेशक ने पिछले किसान दिवस में प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके बाद किसानों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और उनका प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।

केले की फसल की लंबित बीमा राशि पर जताई नाराजगी

किसान दिवस में केले की फसल को हुए नुकसान के बावजूद बीमा क्षतिपूर्ति की राशि नहीं मिलने का मुद्दा प्रमुखता से उठा। किसानों ने शिकायत की कि फसल प्रभावित होने के बाद भी उन्हें बीमा योजना के तहत देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है।

इस पर फसल बीमा कंपनी के जिला समन्वयक ने बताया कि खरीफ 2023 में भारी वर्षा और प्रतिकूल मौसम के कारण केले की फसल को नुकसान पहुंचा था। इसके अलावा खरीफ 2024 और खरीफ 2025 में भी फसल प्रभावित हुई। इसके बावजूद बीमा योजना के अंतर्गत देय क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान किसानों को अब तक नहीं हो सका है।

इस मामले में जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को लंबित प्रकरणों में आवश्यक कार्रवाई करने और प्रभावित किसानों को क्षतिपूर्ति राशि शीघ्र दिलाने के निर्देश दिए।

जिप्सम की उपलब्धता और पीली सरसों की खेती पर हुई चर्चा

बैठक में उप कृषि निदेशक ने जिप्सम खाद की उपलब्धता के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि जनपद में शीघ्र ही इसकी आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही किसानों को कम अवधि में पकने वाली पीली सरसों की फसल तथा प्रति हेक्टेयर संभावित उपज के संबंध में भी जानकारी दी गई।

खुले में कूड़ा डंपिंग पर जिलाधिकारी ने जताई नाराजगी

बैठक के दौरान कूड़ा निस्तारण और खुले में कचरा डंपिंग से संबंधित शिकायतों पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कूड़ा निस्तारण के लिए एमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) की व्यवस्था उपलब्ध है, तो खुले में अवैध रूप से कचरा क्यों डंप किया जा रहा है।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित तरीके से कूड़ा निस्तारण की कार्ययोजना तैयार करने और उसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

विभिन्न विभागों के अधिकारी और किसान रहे मौजूद

किसान दिवस में मुख्य विकास अधिकारी, उप कृषि निदेशक, जिला उद्यान अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, अग्रणी जिला प्रबंधक, अधिशासी अभियंता विद्युत, अधिशासी अभियंता जल निगम (ग्रामीण), फसल बीमा कंपनी के जिला समन्वयक सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आए किसान उपस्थित रहे।

बैठक के अंत में उप कृषि निदेशक ने सभी उपस्थित किसानों एवं अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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