Friday, September 11, 2026
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चारधाम यात्रा 60 लाख श्रद्धालुओं का आंकड़ा छूने की ओर, दूसरे चरण में भूस्खलन जोन बड़ी चुनौती

देहरादून। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा इस बार नया रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रही है। यात्रा का दूसरा चरण 15 सितंबर से शुरू होने जा रहा है और इससे एक बार फिर यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। अब तक चारधाम में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 50 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। सरकार को उम्मीद है कि नवंबर तक चलने वाली यात्रा में यह संख्या बढ़कर करीब 60 लाख तक पहुंच सकती है। हालांकि, यात्रा के दूसरे चरण में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ मार्गों पर मौजूद भूस्खलन जोन प्रशासन और यात्रियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

इस वर्ष 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा का शुभारंभ हुआ था। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ यात्रा पूरी तरह संचालित हुई। मानसून सीजन के दौरान बारिश और भूस्खलन के कारण यात्रा पर असर जरूर पड़ा और श्रद्धालुओं की संख्या में कुछ कमी आई, लेकिन इसके बावजूद यात्रा निर्बाध रूप से जारी रही।

पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 10 सितंबर तक चारधाम यात्रा में 50 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। यात्रा नवंबर तक जारी रहेगी। ऐसे में आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में और तेजी आने की संभावना है। पिछले वर्ष पूरे यात्रा काल में करीब 51 लाख श्रद्धालुओं ने चारधाम के दर्शन किए थे। इस बार अब तक का आंकड़ा पहले ही पिछले साल के करीब पहुंच चुका है, जिससे यात्रा के नया रिकॉर्ड बनाने की उम्मीद बढ़ गई है।

हालांकि, यात्रा के दूसरे चरण में मौसम और भूस्खलन से जुड़ी चुनौतियां प्रशासन की परीक्षा लेंगी। ऋषिकेश से बदरीनाथ और केदारनाथ जाने वाले मार्गों पर कई संवेदनशील भूस्खलन जोन मौजूद हैं। बदरीनाथ मार्ग पर कमेड़ा, पर्थाटीप, मैठाणा, बांजपुर, विरही, भनेरपानी और हाथी पहाड़ जैसे स्थानों पर भूस्खलन की समस्या बनी हुई है। बारिश के दौरान इन स्थानों पर पहाड़ी से मलबा और पत्थर सड़क पर आने से यातायात प्रभावित होने की आशंका रहती है।

यात्रा के दूसरे चरण को देखते हुए सरकार और संबंधित विभागों ने संवेदनशील स्थानों पर मलबा हटाने के साथ ही अस्थायी व्यवस्थाओं पर काम शुरू कर दिया है। हालांकि, भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी और दीर्घकालीन समाधान तैयार करने में समय लग सकता है। 15 सितंबर के बाद श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर इन क्षेत्रों में यातायात दबाव भी बढ़ेगा। ऐसे में भूस्खलन के कारण यातायात जाम लगना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडे ने कहा कि चारधाम यात्रा मार्गों को यातायात के लिए पूरी तरह बहाल रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिन स्थानों पर भूस्खलन की समस्या सामने आ रही है, वहां काम शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और यात्रा मार्गों पर यातायात सुचारु बना रहे।

दूसरे चरण में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन की चुनौती केवल मार्गों को खुला रखने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित मलबा हटाने, यातायात नियंत्रण और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान देना होगा। यदि मौसम साथ देता है और यात्रा मार्ग सुचारु बने रहते हैं, तो इस बार चारधाम यात्रा श्रद्धालुओं की संख्या के लिहाज से नया रिकॉर्ड कायम कर सकती है।

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