देहरादून। उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड भंग होने के बाद भी बिना मान्यता संचालित हो रहे मदरसों के खिलाफ उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण, समाज कल्याण विभाग और शिक्षा विभाग की संयुक्त कार्रवाई लगातार जारी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित नियमों और मान्यता के बिना किसी भी शिक्षण संस्थान का संचालन नहीं होने दिया जाएगा। कार्रवाई के दौरान बंद किए जा रहे मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य को लेकर भी प्राधिकरण ने स्पष्ट व्यवस्था की है।
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का कहना है कि किसी मदरसे को बंद किए जाने के बाद उसके प्रबंधकों की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होगी। प्रबंधन को वहां अध्ययनरत बच्चों के समीप के अल्पसंख्यक विद्यालय में दाखिले के लिए पत्र भी उपलब्ध कराना होगा, ताकि किसी भी बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो। साथ ही सरकार ने मान्यता लेने के इच्छुक मदरसा संचालकों को एक और अवसर दिया है। 30 सितंबर 2026 तक मान्यता के लिए प्राप्त होने वाले आवेदनों को स्वीकार किया जाएगा।
राज्य सरकार के अनुसार प्रदेश में कुल 452 मदरसों की व्यवस्था के तहत अब तक 17 मदरसों को सील किया जा चुका है। इनमें ऊधमसिंह नगर के आठ, हरिद्वार के चार, नैनीताल के चार और देहरादून का एक मदरसा शामिल है। वहीं, तीन मदरसा प्रबंधकों ने स्वयं मदरसा बंद करने की लिखित सूचना प्रशासन को दी है।
सरकार के अनुसार अब तक 200 मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है, जबकि इनमें से 35 मदरसों को सरकार की ओर से मान्यता प्रदान की जा चुकी है। शेष संस्थानों के आवेदनों की जांच और निर्धारित मानकों के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
अल्पसंख्यक मामलों के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में किसी भी शिक्षण संस्थान का संचालन निर्धारित नियमों एवं मान्यता के बिना नहीं होने दिया जाएगा। राज्य में लागू नई व्यवस्था के तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के साथ निर्धारित शैक्षणिक मानकों का अनुपालन कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में संचालित शिक्षण संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। मुख्यमंत्री ने भी स्पष्ट किया है कि बच्चों के भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन कर संचालित किए जा रहे संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के चेयरमैन डा. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी संस्था या समुदाय को परेशान करना नहीं है। सरकार की प्राथमिकता प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि मान्यता और निर्धारित नियमों का पालन शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता तथा बच्चों के भविष्य के लिए आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी और मान्यता के लिए पात्र संस्थानों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अवसर भी दिया जा रहा है।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि 30 सितंबर 2026 तक मान्यता के लिए आवेदन करने वाले मदरसों के आवेदनों पर नियमानुसार विचार किया जाएगा। सरकार का जोर ऐसी शिक्षा व्यवस्था तैयार करने पर है, जिसमें बच्चों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो तथा निर्धारित मानकों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित किया जा सके।
